DISCLAIMER:-
यह जानकारी केवल धार्मिक और शैक्षणिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
वेबसाइट का मालिक किसी भी प्रकार के धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत विवाद के लिए उत्तरदायी नहीं है। सारी जानकारी लोकप्रिय धार्मिक स्रोतों और परंपराओं पर आधारित है।
परिचय:-
दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा या अन्नकूट उत्सव हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ा हुआ है। इस दिन श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं और अन्नकूट का भोग लगाकर भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करते हैं।
गोवर्धन पूजा का इतिहास (HISTORY OF GOVARDHAN PUJA):-
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि वृंदावन के लोग वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते हैं, तो उन्होंने उन्हें समझाया कि असली पालनकर्ता तो प्रकृति और गोवर्धन पर्वत हैं, जिनसे उन्हें अन्न, जल और आश्रय मिलता है।
कृष्ण जी के कहने पर ग्रामीणों ने इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे इंद्र क्रोधित हो गए और भारी वर्षा करने लगे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिन तक उसे छत की तरह धारण किया।
अंततः इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार की और गोवर्धन पूजा का महत्व स्थापित हुआ।

गोवर्धन पूजा की तिथि (DATE OF GOVARDHAN PUJA 2025):-
साल 2025 में गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर (बुधवार) को मनाई जाएगी। यह दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आता है, जो दीपावली के अगले दिन होता है।
गोवर्धन पूजा विधि (GOVARDHAN PUJA VIDHI):-
प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
घर के आंगन या पूजा स्थल पर गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाएं।
गोवर्धन पर्वत की आकृति के चारों ओर फूल, दीपक और मिठाइयाँ रखें।
दूध, दही, घी, शहद और चावल से पूजा करें।
भगवान श्रीकृष्ण, इंद्र देव और गोवर्धन पर्वत का ध्यान करें।
पूजा के बाद अन्नकूट भोग तैयार करें जिसमें विभिन्न प्रकार के अन्न और सब्जियाँ शामिल होती हैं।
अंत में परिक्रमा करें और परिवार व मित्रों के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व (RELIGIOUS SIGNIFICANCE):-
गोवर्धन पूजा प्रकृति की पूजा का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान करना कितना आवश्यक है।
भगवान श्रीकृष्ण का यह पर्व अहंकार के त्याग और भक्ति की श्रेष्ठता का प्रतीक भी है।
इस दिन अन्नकूट का भोग लगाकर लोग समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख–शांति की कामना करते हैं।
अन्नकूट पर्व (ANNAKUT FESTIVAL):-
अन्नकूट का अर्थ है “अन्न का पहाड़”। इस दिन मंदिरों में हजारों प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं।
विशेषकर मथुरा, वृंदावन और गोकुल में यह पर्व अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है।
“गोवर्धन महाराज की जय”, “श्रीकृष्ण गोवर्धनधारी की जय” जैसे जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
गोवर्धन पूजा से जुड़े प्रसिद्ध स्थल:-
गोवर्धन पर्वत (मथुरा, उत्तर प्रदेश) – जहाँ यह पूजा अत्यंत भव्य रूप से मनाई जाती है।
दाऊजी मंदिर, बलदेव – यहाँ भी गोवर्धन पूजा का विशेष आयोजन होता है।
वृंदावन और नंदगांव – अन्नकूट महोत्सव के प्रमुख केंद्र।
गोवर्धन पूजा के अवसर पर गाए जाने वाले भजन / गीत:-
“गोवर्धन गिरिधारी लाला, तेरी लीला न्यारी लाला…”
“जय गोवर्धनधारी गिरिधारी, नंद के लाला तू प्यारे प्यारे…”
“श्रीकृष्ण गोवर्धनधारी, तू ही जगत का सहारा…”
इन भजनों से पूजा का वातावरण और अधिक भक्तिमय बन जाता है।
सामाजिक संदेश:-
गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति का सम्मान करें, पेड़-पौधों, जल और धरती की रक्षा करें।
यह पर्व संतुलित जीवन, कर्म का महत्व, और आभार की भावना को बढ़ावा देता है।
CLICK TO APPLY:
Click the application link below:
👉 Apply Here for SBI Credit Card (Referral Code: 243zfQ0yYm3)
